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सतरà¥à¤• नहीं रहने पर दोबारा हो सकती है टीबी
(कà¥à¤·à¤¯ रोग) अब पहले की तरह उतना घातक à¤à¤²à¥‡ नहीं रहा, लेकिन यह रोग अà¤à¥€ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤°à¥à¤· हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। कमजोर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ वाले लोग इस बीमारी के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° शिकार हैं। यह बीमारी आनà¥à¤µà¤‚शिक à¤à¥€ हो सकती है। टीबी का रोग यदि à¤à¤• बार ठीक हो जाठतो यह दोबारा à¤à¥€ उà¤à¤°à¤•र सामने आ सकता है।
टीबी रोग के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ इलाज के दौरान बचाव के लिठअसà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ की मूल कोशिकाओं में छà¥à¤ª जाते हैं और कà¥à¤› समय बाद फिर से पà¥à¤°à¤•ट होते हैं। यही वजह है कि इलाज के कà¥à¤› महीने या साल बाद टी.बी. की शिकायत दोबारा सामने आ जाती है। इसके अलावा डà¥à¤°à¤— पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• (à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤°) टीबी à¤à¥€ कई बार पूरी तरह दवा लेने से ठीक नहीं होती। गौतमबà¥à¤¦à¥à¤§ नगर में वरà¥à¤· 2016-17 के दौरान 4200 से अधिक टीबी के मरीज सामने आठहैं। इसमें बचà¥à¤šà¥‡, महिलाà¤à¤‚ व पà¥à¤°à¥à¤· सà¤à¥€ शामिल हैं। इनमें से करीब 150 मरीज à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° टीबी के हैं। गत à¤à¤• वरà¥à¤· में तीन से चार मरीजों की टीबी के कारण मौत à¤à¥€ हà¥à¤ˆ है। हालांकि टीबी रोग विशेषजà¥à¤ž व अपर मà¥à¤–à¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ अधिकारी डॉ. शà¥à¤°à¥€à¤· जैन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जिनकी मौत हà¥à¤ˆ, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ टीबी के साथ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ बीमारी à¤à¥€ थी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि सà¤à¥€ सरकारी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में इसकी जांच व दवा नि:शà¥à¤²à¥à¤• मौजूद है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वासà¥à¤¤à¤µ में कà¥à¤·à¤¯ रोग के कीटाणà¥à¤“ं का कई बार जलà¥à¤¦ पता नहीं चल पाता जिस कारण रोगी साधारण वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की तरह ही दिखाई देता है। à¤à¤• बार टीबी पर काबू पाने के बाद मरीज जब दोबारा इस बीमारी से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होता है तो उसके इलाज में बहà¥à¤¤ दिकà¥à¤•़तें आती हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दोबारा मरीज पर कई तरह के à¤à¤‚टीबॉयटिक का असर ही नहीं होता है।
जब à¤à¥€ टीबी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का पता चले तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤ समय पर इसका इलाज शà¥à¤°à¥‚ होने पर बीमारी ठीक हो जाती है। बशरà¥à¤¤à¥‡ लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिà¤à¥¤ अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ यह रोग दोबारा à¤à¥€ हो सकता है।
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